।। श्री विष्णुपुराण प्रवचन ।।

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।। श्री विष्णुपुराण  प्रवचन ।।


( अति शुभ मोली ( रक्षा सूत्र )    


                          मित्रों आज हम आपको मौली या कलावा का महत्व प्रस्तुत प्रस्तुति में बतायेगें!!!!!

मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। 







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यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो पहले से ही रही है, लेकिन इसको संकल्प सूत्र के साथ ही रक्षा-सूत्र के रूप में तब से बांधा जाने लगा, जबसे असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा - सूत्र बांधा था।

 इसे रक्षाबंधन का भी प्रतीक माना जाता है, ‍जबकि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था। 

मौली को हर हिन्दू बांधता है। 

इसे मूलत: रक्षा सूत्र कहते हैं। 

मौली का अर्थ ,,,,,

मौली' का शाब्दिक अर्थ है 'सबसे ऊपर'। 

मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। 

इसका वैदिक नाम उप मणिबंध भी है। मौली के भी प्रकार हैं। 

शंकर भगवान के सिर पर चन्द्रमा विराजमान है इसीलिए उन्हें चंद्रमौली भी कहा जाता है। 

कैसी होती है मौली? 

मौली कच्चे धागे ( सूत ) से बनाई जाती है जिसमें मूलत: 3 रंग के धागे होते हैं- लाल, पीला और हरा, लेकिन कभी-कभी यह 5 धागों की भी बनती है जिसमें नीला और सफेद भी होता है। 

3 और 5 का मतलब कभी त्रिदेव के नाम की, तो कभी पंचदेव। 

कहां-कहां बांधते हैं मौली? 

 मौली को हाथ की कलाई, गले और कमर में बांधा जाता है। 

इसके अलावा मन्नत के लिए किसी देवी-देवता के स्थान पर भी बांधा जाता है और जब मन्नत पूरी हो जाती है तो इसे खोल दिया जाता है। 

इसे घर में लाई गई नई वस्तु को भी बांधा जाता और इसे पशुओं को भी बांधा जाता है।

 मौली बांधने के नियम ,,,,,

शास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए। 

विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का नियम है। 

कलावा बंधवाते समय जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों, उसकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए। 

मौली कहीं पर भी बांधें, एक बात का हमेशा ध्यान रहे कि इस सूत्र को केवल 3 बार ही लपेटना चाहिए व इसके बांधने में वैदिक विधि का प्रयोग करना चाहिए। 

कब बांधी जाती है मौली? 

 पर्व-त्योहार के अलावा किसी अन्य दिन कलावा बांधने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है। 

हर मंगलवार और शनिवार को पुरानी मौली को उतारकर नई मौली बांधना उचित माना गया है। 

उतारी हुई पुरानी मौली को पीपल के वृक्ष के पास रख दें या किसी बहते हुए जल में बहा दें। 

प्रतिवर्ष की संक्रांति के दिन, यज्ञ की शुरुआत में, कोई इच्छित कार्य के प्रारंभ में, मांगलिक कार्य, विवाह आदि हिन्दू संस्कारों के दौरान मौली बांधी जाती है। 

क्यों बांधते हैं मौली? 

मौली को धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। 

किसी अच्छे कार्य की शुरुआत में संकल्प के लिए भी बांधते हैं। 

किसी देवी या देवता के मंदिर में मन्नत के लिए भी बांधते हैं। 

मौली बांधने के 3 कारण हैं- 

पहला आध्यात्मिक, 

दूसरा चिकित्सीय 

और 

तीसरा मनोवैज्ञानिक। 

किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते समय या नई वस्तु खरीदने पर हम उसे मौली बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में शुभता प्रदान करे। 

हिन्दू धर्म में प्रत्येक धार्मिक कर्म यानी पूजा-पाठ, उद्घाटन, यज्ञ, हवन, संस्कार आदि के पूर्व पुरोहितों द्वारा यजमान के दाएं हाथ में मौली बांधी जाती है। 

इसके अलावा पालतू पशुओं में हमारे गाय, बैल और भैंस को भी पड़वा, गोवर्धन और होली के दिन मौली बांधी जाती है।

 मौली करती है रक्षा ,,,,

मौली को कलाई में बांधने पर कलावा या उप मणिबंध करते हैं। 

हाथ के मूल में 3 रेखाएं होती हैं जिनको मणिबंध कहते हैं। 

भाग्य व जीवनरेखा का उद्गम स्थल भी मणिबंध ही है। 

इन तीनों रेखाओं में दैहिक, दैविक व भौतिक जैसे त्रिविध तापों को देने व मुक्त करने की शक्ति रहती है। 

इन मणिबंधों के नाम शिव, विष्णु व ब्रह्मा हैं। 

इसी तरह शक्ति, लक्ष्मी व सरस्वती का भी यहां साक्षात वास रहता है। 

जब हम कलावा का मंत्र रक्षा हेतु पढ़कर कलाई में बांधते हैं तो यह तीन धागों का सूत्र त्रिदेवों व त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है जिससे रक्षा-सूत्र धारण करने वाले प्राणी की सब प्रकार से रक्षा होती है। 

इस रक्षा-सूत्र को संकल्पपूर्वक बांधने से व्यक्ति पर मारण, मोहन, विद्वेषण, उच्चाटन, भूत-प्रेत और जादू-टोने का असर नहीं होता। 

आध्यात्मिक पक्ष ,,,,

शास्त्रों का ऐसा मत है कि मौली बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है। 

ब्रह्मा की कृपा से कीर्ति, विष्णु की कृपा से रक्षा तथा शिव की कृपा से दुर्गुणों का नाश होता है। 

इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति एवं सरस्वती की कृपा से बुद्धि प्राप्त होती है। 

यह मौली किसी देवी या देवता के नाम पर भी बांधी जाती है जिससे संकटों और विपत्तियों से व्यक्ति की रक्षा होती है। 

यह मंदिरों में मन्नत के लिए भी बांधी जाती है। 

इसमें संकल्प निहित होता है। 




मौली बांधकर किए गए संकल्प का उल्लंघन करना अनुचित और संकट में डालने वाला सिद्ध हो सकता है। 

यदि आपने किसी देवी या देवता के नाम की यह मौली बांधी है तो उसकी पवित्रता का ध्यान रखना भी जरूरी हो जाता है। 

कमर पर बांधी गई मौली के संबंध में विद्वान लोग कहते हैं कि इससे सूक्ष्म शरीर स्थिर रहता है और कोई दूसरी बुरी आत्मा आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती है। 

बच्चों को अक्सर कमर में मौली बांधी जाती है। 

यह काला धागा भी होता है। 

इससे पेट में किसी भी प्रकार के रोग नहीं होते।

 चिकित्सीय पक्ष ,,,,

प्राचीनकाल से ही कलाई, पैर, कमर और गले में भी मौली बांधे जाने की परंपरा के ‍चिकित्सीय लाभ भी हैं। 

शरीर विज्ञान के अनुसार इससे त्रिदोष अर्थात वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है। 

पुराने वैद्य और घर-परिवार के बुजुर्ग लोग 

हाथ, कमर, गले व पैर के अंगूठे में मौली का उपयोग करते थे, जो शरीर के लिए लाभकारी था।

ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना हितकर बताया गया है। 

हाथ में बांधे जाने का लाभ ,,, 

शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है अतः यहां मौली बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। 

उसकी ऊर्जा का ज्यादा क्षय नहीं होता है। 

शरीर विज्ञान के अनुसार शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती हैं। 

कलाई पर कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है। 

 कमर पर बांधी गई मौली के संबंध में विद्वान लोग कहते हैं कि इससे सूक्ष्म शरीर स्थिर रहता है और कोई दूसरी बुरी आत्मा आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती है। 

बच्चों को अक्सर कमर में मौली बांधी जाती है। 

यह काला धागा भी होता है। 

इससे पेट में किसी भी प्रकार के रोग नहीं होते। 

मनोवैज्ञानिक लाभ ,,,,

मौली बांधने से उसके पवित्र और शक्तिशाली बंधन होने का अहसास होता रहता है और इससे मन में शांति और पवित्रता बनी रहती है। 

व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते और वह गलत रास्तों पर नहीं भटकता है। 

कई मौकों पर इससे व्यक्ति गलत कार्य करने से बच जाता है।

             !!शुभमस्तु!!

जय श्री कृष्ण

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

।। हमारी सनातन सांस्कृतिक में अंग्रेजी प्रयोग बहुत अर्थ के अनर्थ कर देते है ।। ।। तमसो मा ज्योतिर्गमय ।। *12 बातें जो हर सनातन धर्म अनुयायी को ध्यान रखनी चाहिए।*

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........

जय द्वारकाधीश


।। हमारी सनातन सांस्कृतिक में अंग्रेजी प्रयोग बहुत अर्थ के अनर्थ कर देते है ।।


।। तमसो मा ज्योतिर्गमय ।।


*12 बातें जो हर सनातन धर्म अनुयायी  को ध्यान रखनी चाहिए।*

     

1.  क्या भगवान राम या भगवान कृष्ण कभी इंग्लैंड के


 *house of lord*


 के सदस्य रहे थे ? 


नहीं ना...


तो फिर ये क्या 


~Lord Rama, Lord Krishna~ 


लगा रखा है ?  


सीधे सीधे 


*भगवान राम, भगवान कृष्ण* 


कहिये - अंग्रेजी में भी ।


2. किसी की मृत्यु होने पर


 ~RIP~ 


बिलकुल मत कहिये। 


 यानी 


rest in peace 


जो दफ़नाने वालों के लिए कहा जाता है। 


आप कहिये -


 *"ओम शांति"*, 


अथवा 


*"मोक्ष प्राप्ति हो"* ! 


 आत्मा कभी एक स्थान पर _आराम या विश्राम नहीं करती !


 आत्मा का पुनर्जन्म होता है अथवा उसे मोक्ष मिलता है !_


3. अपने रामायण एवं महाभारत जैसे ग्रंथों को कभी भी


 ~mythological~ 


मत कहियेगा !  

    *"mythological" शब्द बना है "myth" से और "myth" शब्द बना है हिंदी के "मिथ्या" शब्द से।*


    *"मिथ्या" अर्थात 'झूठा' या 'जिसका कोई अस्तित्व ना हो'*


और हमारे सभी देवी देवता, राम और कृष्ण


 *वास्तविक रूप में प्रकट हुए हैं*

ये हमारा 


*गौरवशाली इतिहास* 


है और 


*राम एवं कृष्ण* 


हमारे ऐतिहासिक देवपुरुष हैं , _


कोई 


~mythological कलाकार~ 


नहीं !_


4. _अपने इष्ट देवों का नाम आदर सहित लें।  


उनका मज़ाक न बनने दें !_


5. हमारें मंदिरों को


 ~प्रार्थनागृह~ 


न कहें !  


मंदिर 


*देवालय* 


होते हैं। _


भगवान के निवासगृह_ ! 


वह 


~प्रार्थनागृह~ 


नहीं होते ! 


_मंदिर में केवल प्रार्थना नहीं होती ! 


अन्य पूजा पद्धति में सिर्फ साप्ताहिक प्रार्थना होती है, जबकि हिंदू धर्म में ये नित्य कर्म है।_


6. अपने बच्चों के जन्मदिन पर दीप 


~बुझा~ 


के अपशकुन न करें ! 


अग्निदेव को न बुझाएँ !


    *दीप प्रज्ज्वलित करना अर्थात प्रकाश का संचार करना*


अपितु बच्चों को दीप की प्रार्थना सिखायें 


*"तमसो मा ज्योतिर्गमय"* 


( _हे अग्नि देवता, मुझे अंधेरे से उजाले की ओर जाने का रास्ता बताएँ_ ) 


ये सारे प्रतीक बच्चों के मस्तिष्क में गहरा असर करते हैं !


7. कृपया 


~spirituality~ 


और 


~materialistic~ 


जैसे शब्दों का उपयोग करने से बचें ! 


_हिंदूओं के लिये सारा विश्व दिव्यत्व से भरा है !_


 ~spirituality~ 


और 


~materialistic~ 


जैसे शब्द अनेक वर्ष पहले यूरोप से यहाँ आये जिन्होंने चर्च और सत्ता में फर्क किया था - या विज्ञान और धर्म में !  


_इसके विपरीत भारतवर्ष में ऋषि मुनि हमारे पहले वैज्ञानिक थे और सनातन धर्म का मूल विज्ञान में ही है ! 


यंत्र, तंत्र, एवं मंत्र यह हमारे धर्म का ही हिस्सा हैं !_


8.  ~"Sin"~ 


इस शब्द के स्थान पर "पाप" शब्द का प्रयोग करें ! 

हम हिंदूओं में केवल


 *धर्म* 


( कर्तव्यपरायणता, न्याय, एवं प्राप्त अधिकार ) और 


*अधर्म* 


(जब धर्म पालन न हो) है ! _


पाप अधर्म का हिस्सा है !_


9. ध्यान के लिये


 ~'meditation'~


 एवं प्राणायाम के लिये


 ~'breathing exercise'~


 इन संज्ञाओं का प्रयोग न करें ! 


_यह बिलकुल विपरीत अर्थ ध्वनित करते हैं !_


10. क्या आप भगवान से डरते हैं ? 


नहीं ना , डरना भी नहीं चाहिए,  


*क्योंकि भगवान तो चराचर में विद्यमान हैं*।


 अजन्मा, परोपकारी, न्यायकारी और सर्वशक्तिमान हैं ! 


इतना ही नहीं हम मे स्वयं भगवान का अन्श मौजुद हैं ! 


तो फिर अपने आपको "God fearing" अर्थात भगवान से डरने वाला मत कहिये !


  *God believer या भगवान में विश्वास रखने वाला कहिए*


11. कभी भी किसी को बधाई देनी हो तो 'बधाई' या 'शुभकामनाएँ' शब्द का प्रयोग कीजिये और बधाई स्वीकार करनी हो तो धन्यवाद शब्द प्रयोग कीजिये।  


~मुबारक और शुक्रिया~ 


शब्द का प्रयोग न किया जाए क्योंकि इनके अर्थ अलग हैं । 


12.  हिन्दुओं में 7 फेरे लेकर विवाह किया जाता है। 


कोई कॉन्ट्रैक्ट का विवाह नहीं होता। 


इस लिए TV आदि फिल्में देखकर देखकर भेड़चाल में अपनी धर्मपत्नी को 


~बीवी~ 


मत कहिए।  


यदि आप उन्हें अपनी जीवन संगिनी मानते हैं तो पत्नी शब्द प्रयोग कीजिये।  


यदि आप उनको कॉन्ट्रैक्ट के साथ ब्याह कर लाये हैं तो आप बीवी कह सकते हैं ।


ध्यान रहे, विश्व में केवल उनका सम्मान होता है जो स्वयं का सम्मान करते है !  


मेरी पोस्ट किसी के विरुद्ध नहीं है, ये बस अपनी सनातन संस्कृति के लिए आदर है।


*सनातन धर्म के मान के लिए, सम्मान बढ़ाने के लिए इन विचारों को अपने सभी मित्रों एवं संबंधियों के साथ अवश्य ही साझा (share) करें और अपने हिन्दू होने पर गर्व और गौरव करें.....*


🚩 *जय सोमनाथ* 🚩

🙏 *जय द्वारकाधीश*🙏

🙏🙏🙏【【【【【{{{{ (((( मेरा पोस्ट पर होने वाली ऐडवताइस के ऊपर होने वाली इनकम का 50 % के आसपास का भाग पशु पक्षी ओर जनकल्याण धार्मिक कार्यो में किया जाता है.... जय जय परशुरामजी ))))) }}}}}】】】】】🙏🙏🙏


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।। सुंदर कहानी ।।एक बोध कथा 〰🌼🌼〰*एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में, एक वृद्ध किसान अपने एकलौते पुत्र के साथ रहता था।* *उनके स्वामित्व में एक छोटा सा खेत का टुकड़ा, एक गाय, और एक घोड़ा था।*

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।। सुंदर कहानी ।।

एक बोध कथा 

〰🌼🌼〰

*एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में, एक वृद्ध किसान अपने एकलौते पुत्र के साथ रहता था।* 

*उनके स्वामित्व में एक छोटा सा खेत का टुकड़ा, एक गाय, और एक घोड़ा था।*

एक दिन उसका घोड़ा कहीं भाग गया। 

उन लोगों ने घोड़े को ढूँढने की बहुत कोशिश की पर घोड़ा नहीं मिला। 

किसान का पुत्र बहुत दुखी हो गया। 

वृद्ध किसान के पड़ोसी भी मिलने आये।

*गांववालों ने किसान को सांत्वना देने के लिए कहा, “ईश्वर आपके प्रति बहुत कठोर है, यह आपके साथ बहुत बुरा हुआ।”*

किसान ने शांत भाव से उत्तर दिया, “यह निश्चित रूप से ईश्वरीय कृपा है।”

*दो दिनों बाद घोड़ा वापस आ गया, लेकिन अकेला नहीं।*

 *चार अच्छे शक्तिशाली जंगली घोड़े भी उसके पीछे-पीछे आये।* 

*इस तरह से उस वृद्ध किसान के पास पांच घोड़े हो गए।*

लोगों ने कहा, “बहुत खूब। तुम तो बहुत भाग्यशाली हो।”

*बहुत ही सम भाव से कृतज्ञ होते हुए वृद्ध किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी ईश्वरीय कृपा है।”

उसका पुत्र बहुत उत्साहित हुआ। 

दूसरे ही दिन उसने एक जंगली घोड़े को जाँचने के लिए उसकी सवारी की, किन्तु घोड़े से वो गिर गया और उसका पैर टूट गया।*

पड़ोसियों ने अपनी बुद्धिमता दिखाते हुए कहा,।
ये घोड़े अच्छे नहीं हैं। 

वो आपके लिए दुर्भाग्य लाये हैं, आखिरकार आपके पुत्र का पाँव टूट गया।”

*किसान ने उत्तर दिया, “यह भी उनकी कृपा है।”

कुछ दिनों बाद, राजा के अधिकारीगण गाँव में आवश्यक सैन्य सेवा हेतु युवकों को भर्ती करने के लिए आये। 

वे गाँव के सारे नवयुवकों को ले गए लेकिन टूटे पैर के कारण किसान के पुत्र को छोड़ दिया।*

कुढ़न और स्नेह से गांववालों ने किसान को बधाई दी कि उसका पुत्र जाने से बच गया।

*किसान ने कहा, “निश्चित रूप से यह भी उनकी ही कृपा है।”*

ये हमेशा ध्यान रखे के प्रभु कभी भी किसी का बुरा नही करते ना ही सोचते ॥ 

हुम जीव ऐसे है के हमेशा प्रभु को ही दोष देते है के हुम तो इतना भजन करते है। 

सेवा करते है तब भी भगवान हमरे साथ एस करते है जब की ऐसी मिथ्या शौच जीव की होती है प्रभु पे विश्वास दृढ़ता और धेर्य रखने चहिये चाहिये । 

हमरे जीवन मे जो भी होत है वो हमारे कर्मों क हिसाब होता है चाहे अच्छा हो बुरा हो ये हमरी सोच है ॥
जय श्री कृष्ण
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।। श्री व्रतकथा प्रवचन ।।

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।। श्री व्रतकथा प्रवचन ।।


*🌹परमा ( कामदा ) एकादशी*

 

*🌹अर्जुन बोले : हे जनार्दन !*


*आप अधिक ( लौंद / मल / पुरुषोत्तम ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम तथा उसके व्रत की विधि बतलाइये ।* 







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*इसमें किस देवता की पूजा की जाती है तथा इसके व्रत से क्या फल मिलता है?*
 
*🌹श्रीकृष्ण बोले : हे पार्थ !* 

 *इस एकादशी का नाम ‘परमा’ है ।* 

*इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं तथा मनुष्य को इस लोक में सुख तथा परलोक में मुक्ति मिलती है ।* 

*भगवान विष्णु की धूप, दीप, नैवेध, पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए ।* 

*महर्षियों के साथ इस एकादशी की जो मनोहर कथा काम्पिल्य नगरी में हुई थी, कहता हूँ ।* 

*ध्यानपूर्वक सुनो :*
 
*🌹काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का अत्यंत धर्मात्मा ब्राह्मण रहता था ।* 

*उसकी स्त्री अत्यन्त पवित्र तथा पतिव्रता थी ।* 

*पूर्व के किसी पाप के कारण यह दम्पति अत्यन्त दरिद्र था ।* 

*उस ब्राह्मण की पत्नी अपने पति की सेवा करती रहती थी तथा अतिथि को अन्न देकर स्वयं भूखी रह जाती थी ।*
 
*🌹एक दिन सुमेधा अपनी पत्नी से बोला: ‘हे प्रिये !* 

*गृहस्थी धन के बिना नहीं चलती इसलिए मैं परदेश जाकर कुछ उद्योग करुँ ।’*
 
*🌹उसकी पत्नी बोली: ‘हे प्राणनाथ !* 

*पति अच्छा और बुरा जो कुछ भी कहे, पत्नी को वही करना चाहिए ।* 

*मनुष्य को पूर्वजन्म के कर्मों का फल मिलता है ।* 

*विधाता ने भाग्य में जो कुछ लिखा है, वह टाले से भी नहीं टलता ।* 

*हे प्राणनाथ !* 

*आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं, जो भाग्य में होगा, वह यहीं मिल जायेगा ।’*
 
*🌹पत्नी की सलाह मानकर ब्राह्मण परदेश नहीं गया ।* 

*एक समय कौण्डिन्य मुनि उस जगह आये ।* 

*उन्हें देखकर सुमेधा और उसकी पत्नी ने उन्हें प्रणाम किया और बोले: ‘आज हम धन्य हुए ।* 

*आपके दर्शन से हमारा जीवन सफल हुआ ।’* 

*मुनि को उन्होंने आसन तथा भोजन दिया ।*
 
*🌹भोजन के पश्चात् पतिव्रता बोली: ‘हे मुनिवर !* 

*मेरे भाग्य से आप आ गये हैं ।* 

*मुझे पूर्ण विश्वास है कि अब मेरी दरिद्रता शीघ्र ही नष्ट होनेवाली है ।* 

*आप हमारी दरिद्रता नष्ट करने के लिए उपाय बतायें ।’*
 
*🌹इस पर कौण्डिन्य मुनि बोले : ‘अधिक मास’ ( मल मास ) की कृष्णपक्ष की ‘परमा एकादशी’ के व्रत से समस्त पाप, दु:ख और दरिद्रता आदि नष्ट हो जाते हैं ।* 

*जो मनुष्य इस व्रत को करता है, वह धनवान हो जाता है ।* 

*इस व्रत में कीर्तन भजन आदि सहित रात्रि जागरण करना चाहिए ।* 

*महादेवजी ने कुबेर को इसी व्रत के करने से धनाध्यक्ष बना दिया है ।’*
 
*🌹फिर मुनि कौण्डिन्य ने उन्हें ‘परमा एकादशी’ के व्रत की विधि कह सुनायी ।* 

*मुनि बोले: ‘हे ब्राह्मणी !* 

*इस दिन प्रात: काल नित्यकर्म से निवृत्त होकर विधिपूर्वक पंचरात्रि व्रत आरम्भ करना चाहिए ।* 

*जो मनुष्य पाँच दिन तक निर्जल व्रत करते हैं, वे अपने माता पिता और स्त्रीसहित स्वर्गलोक को जाते हैं ।* 

*हे ब्राह्मणी !* 

*तुम अपने पति के साथ इसी व्रत को करो ।* 

*इससे तुम्हें अवश्य ही सिद्धि और अन्त में स्वर्ग की प्राप्ति होगी |’*
 
*🌹कौण्डिन्य मुनि के कहे अनुसार उन्होंने ‘परमा एकादशी’ का पाँच दिन तक व्रत किया ।* 

*व्रत समाप्त होने पर ब्राह्मण की पत्नी ने एक राजकुमार को अपने यहाँ आते हुए देखा ।* 

*राजकुमार ने ब्रह्माजी की प्रेरणा से उन्हें आजीविका के लिए एक गाँव और एक उत्तम घर जो कि सब वस्तुओं से परिपूर्ण था, रहने के लिए दिया ।* 

*दोनों इस व्रत के प्रभाव से इस लोक में अनन्त सुख भोगकर अन्त में स्वर्गलोक को गये ।*
 
*🌹हे पार्थ !* 

*जो मनुष्य ‘परमा एकादशी’ का व्रत करता है।* 

*उसे समस्त तीर्थों व यज्ञों आदि का फल मिलता है ।* 

*जिस प्रकार संसार में चार पैरवालों में गौ, देवताओं में इन्द्रराज श्रेष्ठ हैं।* 






उसी प्रकार मासों में अधिक मास उत्तम है ।* 

*इस मास में पंचरात्रि अत्यन्त पुण्य देनेवाली है ।* 

*इस महीने में ‘पद्मिनी एकादशी’ भी श्रेष्ठ है।*

*उसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्यमय लोकों की प्राप्ति होती है ।*
 
*🌹व्रत खोलने की विधि :*

 *द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर ।* 

*भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए ।*

*‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ -* 

*यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।*
*जय श्री कृष्ण*

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Ramanatha Swami Covil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits , V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . + 91- 7010668409 / + 91- 7598240825 WHATSAPP नंबर : + 91 7598240825 ( तमिलनाडु )
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आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

।। श्री गरुड़ पुराण प्रवचन ।।#मादा_बिच्छू_के_जन्म_का_दुःख जब मनुष्य जन्म में कैसा पाप धर्म होता है उसके कर्म के आधारित ही नया जन्म के शुरुआती होती है ।इस जन्म के आधारित जितना पाप पुण्य किये हो इसका फल इस जन्म में मिल जाय या तो नया जन्म भी उसका लेनदेन का हिशाब अचूक चूकते करना ही पड़ता है।

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।। श्री गरुड़ पुराण प्रवचन ।।


#मादा_बिच्छू_के_जन्म_का_दुःख 

जब मनुष्य जन्म में कैसा पाप धर्म होता है उसके कर्म के आधारित ही नया जन्म के शुरुआती होती है ।

इस जन्म के आधारित जितना पाप पुण्य किये हो इसका फल इस जन्म में मिल जाय या तो नया जन्म भी उसका लेनदेन का हिशाब अचूक चूकते करना ही पड़ता है।

इसकी अस्थिमज्जा पर मौजूद ये इसके बच्चे हैं।

ये जन्म लेते ही अपनी मां की पीठ पर बैठ जाते हैं और उसके शरीर को ही खाना प्रारम्भ कर देते हैं।

तब तक खाते हैं।

जब तक कि  उसकी केवल अस्थियां ही शेष ना रह जाए। 

वो तङपती है ।

कराहती है ।

लेकिन ये पिछा नहीं छोङते ।

नीचे दिया गया चित्र एक मादा बिच्छु का है ।
और पलभर में नही मार देते बलकि कई दिनों तक यह मौत से बदतर असहनीय पीङा को झेलती हुई दम तोङती है। 

लख चौरासी के कुचक्र में ऐसी ऐसी असंख्य योनियां हैं ।

जिनकी स्थितियां अज्ञात हैं ।

कदाचित् इसीलिए भवसागर को अगम अपार कहा गया है।  

गरुड़ पुराण एवं ऋषिमत के मुताबिक। 

यह भी इन्सानी जूनीं मे किए गये कर्मों का ही भुगतान है। 

इन्सान इस मनुष्य जीवन में जो कर्म करेगा ।

नाना प्रकार  की असंख्य योनियों में इन कर्मों के आधार से ही उसे दुःख सुख मिलते रहेंगे। 

  चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोय 
दोय पाटन के बीच में।
 साबुत बचा ना कोय।
जय श्री कृष्ण...!
🙏🙏🙏【【【【【{{{{ (((( मेरा पोस्ट पर होने वाली ऐडवताइस के ऊपर होने वाली इनकम का 50 % के आसपास का भाग पशु पक्षी ओर जनकल्याण धार्मिक कार्यो में किया जाता है.... जय जय परशुरामजी ))))) }}}}}】】】】】🙏🙏🙏

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 25 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Dhanlakshmi Strits , Marwar Strits, RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏