।। श्री व्रतकथा प्रवचन ।।

सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता,  किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश

।। श्री व्रतकथा प्रवचन ।।


*🌹परमा ( कामदा ) एकादशी*

 

*🌹अर्जुन बोले : हे जनार्दन !*


*आप अधिक ( लौंद / मल / पुरुषोत्तम ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी का नाम तथा उसके व्रत की विधि बतलाइये ।* 







Noise Twist Round dial Smart Watch with Bluetooth Calling, 1.38" TFT Display, up-to 7 Days Battery, 100+ Watch Faces, IP68, Heart Rate Monitor, Sleep Tracking (Jet Black)

Visit the Noise Store   https://amzn.to/3LMV3uV



*इसमें किस देवता की पूजा की जाती है तथा इसके व्रत से क्या फल मिलता है?*
 
*🌹श्रीकृष्ण बोले : हे पार्थ !* 

 *इस एकादशी का नाम ‘परमा’ है ।* 

*इसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं तथा मनुष्य को इस लोक में सुख तथा परलोक में मुक्ति मिलती है ।* 

*भगवान विष्णु की धूप, दीप, नैवेध, पुष्प आदि से पूजा करनी चाहिए ।* 

*महर्षियों के साथ इस एकादशी की जो मनोहर कथा काम्पिल्य नगरी में हुई थी, कहता हूँ ।* 

*ध्यानपूर्वक सुनो :*
 
*🌹काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का अत्यंत धर्मात्मा ब्राह्मण रहता था ।* 

*उसकी स्त्री अत्यन्त पवित्र तथा पतिव्रता थी ।* 

*पूर्व के किसी पाप के कारण यह दम्पति अत्यन्त दरिद्र था ।* 

*उस ब्राह्मण की पत्नी अपने पति की सेवा करती रहती थी तथा अतिथि को अन्न देकर स्वयं भूखी रह जाती थी ।*
 
*🌹एक दिन सुमेधा अपनी पत्नी से बोला: ‘हे प्रिये !* 

*गृहस्थी धन के बिना नहीं चलती इसलिए मैं परदेश जाकर कुछ उद्योग करुँ ।’*
 
*🌹उसकी पत्नी बोली: ‘हे प्राणनाथ !* 

*पति अच्छा और बुरा जो कुछ भी कहे, पत्नी को वही करना चाहिए ।* 

*मनुष्य को पूर्वजन्म के कर्मों का फल मिलता है ।* 

*विधाता ने भाग्य में जो कुछ लिखा है, वह टाले से भी नहीं टलता ।* 

*हे प्राणनाथ !* 

*आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं, जो भाग्य में होगा, वह यहीं मिल जायेगा ।’*
 
*🌹पत्नी की सलाह मानकर ब्राह्मण परदेश नहीं गया ।* 

*एक समय कौण्डिन्य मुनि उस जगह आये ।* 

*उन्हें देखकर सुमेधा और उसकी पत्नी ने उन्हें प्रणाम किया और बोले: ‘आज हम धन्य हुए ।* 

*आपके दर्शन से हमारा जीवन सफल हुआ ।’* 

*मुनि को उन्होंने आसन तथा भोजन दिया ।*
 
*🌹भोजन के पश्चात् पतिव्रता बोली: ‘हे मुनिवर !* 

*मेरे भाग्य से आप आ गये हैं ।* 

*मुझे पूर्ण विश्वास है कि अब मेरी दरिद्रता शीघ्र ही नष्ट होनेवाली है ।* 

*आप हमारी दरिद्रता नष्ट करने के लिए उपाय बतायें ।’*
 
*🌹इस पर कौण्डिन्य मुनि बोले : ‘अधिक मास’ ( मल मास ) की कृष्णपक्ष की ‘परमा एकादशी’ के व्रत से समस्त पाप, दु:ख और दरिद्रता आदि नष्ट हो जाते हैं ।* 

*जो मनुष्य इस व्रत को करता है, वह धनवान हो जाता है ।* 

*इस व्रत में कीर्तन भजन आदि सहित रात्रि जागरण करना चाहिए ।* 

*महादेवजी ने कुबेर को इसी व्रत के करने से धनाध्यक्ष बना दिया है ।’*
 
*🌹फिर मुनि कौण्डिन्य ने उन्हें ‘परमा एकादशी’ के व्रत की विधि कह सुनायी ।* 

*मुनि बोले: ‘हे ब्राह्मणी !* 

*इस दिन प्रात: काल नित्यकर्म से निवृत्त होकर विधिपूर्वक पंचरात्रि व्रत आरम्भ करना चाहिए ।* 

*जो मनुष्य पाँच दिन तक निर्जल व्रत करते हैं, वे अपने माता पिता और स्त्रीसहित स्वर्गलोक को जाते हैं ।* 

*हे ब्राह्मणी !* 

*तुम अपने पति के साथ इसी व्रत को करो ।* 

*इससे तुम्हें अवश्य ही सिद्धि और अन्त में स्वर्ग की प्राप्ति होगी |’*
 
*🌹कौण्डिन्य मुनि के कहे अनुसार उन्होंने ‘परमा एकादशी’ का पाँच दिन तक व्रत किया ।* 

*व्रत समाप्त होने पर ब्राह्मण की पत्नी ने एक राजकुमार को अपने यहाँ आते हुए देखा ।* 

*राजकुमार ने ब्रह्माजी की प्रेरणा से उन्हें आजीविका के लिए एक गाँव और एक उत्तम घर जो कि सब वस्तुओं से परिपूर्ण था, रहने के लिए दिया ।* 

*दोनों इस व्रत के प्रभाव से इस लोक में अनन्त सुख भोगकर अन्त में स्वर्गलोक को गये ।*
 
*🌹हे पार्थ !* 

*जो मनुष्य ‘परमा एकादशी’ का व्रत करता है।* 

*उसे समस्त तीर्थों व यज्ञों आदि का फल मिलता है ।* 

*जिस प्रकार संसार में चार पैरवालों में गौ, देवताओं में इन्द्रराज श्रेष्ठ हैं।* 






उसी प्रकार मासों में अधिक मास उत्तम है ।* 

*इस मास में पंचरात्रि अत्यन्त पुण्य देनेवाली है ।* 

*इस महीने में ‘पद्मिनी एकादशी’ भी श्रेष्ठ है।*

*उसके व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्यमय लोकों की प्राप्ति होती है ।*
 
*🌹व्रत खोलने की विधि :*

 *द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर ।* 

*भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए ।*

*‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ -* 

*यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।*
*जय श्री कृष्ण*

पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:- 
-: 1987 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science) 
" Opp. Shri Ramanatha Swami Covil Car Parking Ariya Strits , Nr. Maghamaya Amman Covil Strits , V.O.C. Nagar , RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
सेल नंबर: . + 91- 7010668409 / + 91- 7598240825 WHATSAPP नंबर : + 91 7598240825 ( तमिलनाडु )
Skype : astrologer85
Email: prabhurajyguru@gmail.com
आप इसी नंबर पर संपर्क/सन्देश करें...धन्यवाद.. 
नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏

No comments:

Post a Comment