सभी ज्योतिष मित्रों को मेरा निवेदन हे आप मेरा दिया हुवा लेखो की कोपी ना करे में किसी के लेखो की कोपी नहीं करता, किसी ने किसी का लेखो की कोपी किया हो तो वाही विद्या आगे बठाने की नही हे कोपी करने से आप को ज्ञ्नान नही मिल्त्ता भाई और आगे भी नही बढ़ता , आप आपके महेनत से तयार होने से बहुत आगे बठा जाता हे धन्यवाद ........
जय द्वारकाधीश
।। श्री भविष्यपुराण प्रवचन ।।
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*🎋होनी तो प्रबल है🎋*
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*सीता विवाह और राम का राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त में किया गया।*
*फिर भी न वैवाहिक जीवन सफल हुआ न राज्याभिषेक।*
*जब मुनि वसिष्ठ से इसका जवाब मांगा गया तो उन्होंने साफ कह दिया।*
*सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहूं मुनिनाथ।*
*लाभ हानि, जीवन....!!!
*अर्थात, जो विधि ने निर्धारित किया है वही होकर रहेगा।*
*न राम के जीवन को बदला जा सका, न कृष्ण के।*
*न ही शिव ने शती के मृत्यु को टाल सके, जबकि मृत्युंजय मंत्र उन्ही का आवाहन करता है।*
*रामकृष्ण परमहंस भी अपने कैंसर को न टाल सके।*
*न रावण ने अपने जीवन को बदल पाया न कंस।*
*जबकि दोनों के पास समस्त शक्तियाँ थी।*
*मानव अपने जन्म के साथ ही जीवन मरण, यस अपयश, लाभ हानि, स्वास्थ, बीमारी, देह रंग, परिवार समाज, देश स्थान सब पहले से ही निर्धारित कर के आता है।*
*साथ ही साथ अपने विशेष गुण धर्म, स्वभाव, और संस्कार सब पूर्व से लेकर आता है।*
*इस लिए यदि अपने जीवन मे परिवतर्न चाहते हैं ।*
*तो अपने कर्म बदलें।*
*आप के मदद के लिए स्वयं आपकी आत्मा और परमात्मा दोनों खड़े है।*
*उसे पुकारें। वह परमात्मा ही आप का सच्चा साथी है।*
*परमपिता परमात्मा से ज्यादा शुभ चिंतक भला कौन हो सकता है हमारा ?*
*परीक्षा संसार की।*
*प्रतीक्षा परमात्मा की।*
*और समीक्षा अपनी करनी चाहिए।*
*लेकिन हम*
*परीक्षा परमात्मा की।*
*प्रतीक्षा सुख की।*
*और समीक्षा दूसरों की करते हैं।*
🙏जय जय राम राम श्री सीताराम🙏
समय ही सर्वशक्तिमान है : -
एक पौराणिक सत्य -
हमारे शास्त्रों में एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है : -
तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान।
भीलों लूटी गोपियां, वही अर्जुन वही बाण।।
अर्थात : - इस संसार में व्यक्ति महान नहीं होता, समय' महान और बलवान होता है।
समय ही है जो किसी को अर्श पर बिठाता है और किसी को फर्श पर।
इस का सबसे बड़ा उदाहरण महान धनुर्धर अर्जुन हैं।
वही अर्जुन, जिनके गांडीव की टंकार से तीनों लोक कांपते थे, समय पलटने पर साधारण भीलों ( लुटेरों ) से गोपियों की रक्षा नहीं कर पाए।
आइये, इस सत्य के पीछे की पौराणिक कथा को जानते हैं:-
यह उस समय की बात है जब गांधारी और दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण यदुवंश का अंत निकट था।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपने स्वधाम गमन से पहले अर्जुन को द्वारका बुलाया और एक अंतिम महत्वपूर्ण कार्य सौंपा द्वारका की सभी स्त्रियों और गोपियों को सुरक्षित हस्तिनापुर ले जाओ।
श्रीकृष्ण और यदुवंशियों के अंतिम संस्कार के बाद, शोक संतप्त अर्जुन द्वारका की स्त्रियों और अपार धन - संपदा को लेकर हस्तिनापुर के लिए निकले।
महायोद्धा की विवशता : -
रास्ते में धन के लोभी भीलों और ग्रामीणों ने इस काफिले को घेर लिया।
अर्जुन को अपने पराक्रम पर पूरा भरोसा था।
उन्होंने उन्हें चेतावनी दी, परंतु जब लुटेरे नहीं माने, तो अर्जुन ने अपना विश्व प्रसिद्ध 'गांडीव' धनुष उठाया।
लेकिन यह क्या ?
अर्जुन बार - बार मंत्र पढ़कर अपने दिव्यास्त्रों का आह्वान कर रहे थे, किन्तु कोई भी दिव्यास्त्र प्रकट नहीं हुआ।
उनका दिव्य गांडीव एक साधारण लकड़ी के धनुष समान भारी हो गया।
अग्निदेव द्वारा दिया गया 'अक्षय तूणीर' ( जिसमें बाण कभी खत्म नहीं होते थे ) खाली हो गया।
महाभारत युद्ध में कौरवों की विशाल सेना का संहार करने वाले अर्जुन आज साधारण लुटेरों के सामने असहाय खड़े थे।
देखते ही देखते भीलों ने गोपियों और संपत्ति को लूट लिया।
महर्षि व्यास का ज्ञान और समय का चक्र : -
लज्जा और शोक में डूबे अर्जुन महर्षि वेदव्यास के पास पहुंचे और अपनी पराजय का कारण पूछा।
तब व्यासजी ने जीवन का सबसे बड़ा सत्य समझाया : -
हे अर्जुन! शोक मत करो।
तुम जिस शक्ति पर गर्व करते थे, वह वास्तव में तुम्हारी थी ही नहीं।
वह सारी शक्ति स्वयं श्रीकृष्ण की थी।
जब तक वे तुम्हारे साथ थे, तुम्हारी भुजाओं में बल और गांडीव में तेज था।
उनके स्वधाम जाते ही वह शक्ति भी चली गई।
वेदव्यास जी ने आगे कहा : -
अब नवयुग ( कलियुग ) का आरंभ हो रहा है।
समय बदल चुका है।
तुम्हारे अस्त्रों - शस्त्रों का प्रयोजन ( उद्देश्य ) पूरा हो चुका है।
किसी भी शक्ति का महत्व तभी तक रहता है जब तक संसार को उसकी आवश्यकता होती है।
यह जो कुछ भी हुआ, वह समय का फेर और प्रभु की इच्छा थी।
निष्कर्ष : -
अर्जुन ने समय के इस परिवर्तन को स्वीकार किया।
उन्होंने श्रीकृष्ण की अंतिम आज्ञा मानकर उनके प्रपौत्र वज्रनाभ जी ( जिनके नाम पर ब्रजमंडल है ) का राज्याभिषेक किया।
यह कथा हमें सिखाती है कि शक्ति, पद और प्रतिष्ठा का अहंकार व्यर्थ है।
समय का चक्र जब घूमता है, तो परिस्थितियां बदलते देर नहीं लगती।
इस लिए सदैव विनम्र रहें।
|| जय श्री कृष्ण ||
पंडित राज्यगुरु प्रभुलाल पी. वोरिया क्षत्रिय राजपूत जड़ेजा कुल गुर:-
PROFESSIONAL ASTROLOGER EXPERT IN:-
-: 25 YEARS ASTROLOGY EXPERIENCE :-
(2 Gold Medalist in Astrology & Vastu Science)
" Opp. Shri Dhanlakshmi Strits , Marwar Strits, RAMESHWARM - 623526 ( TAMILANADU )
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नोट ये मेरा शोख नही हे मेरा जॉब हे कृप्या आप मुक्त सेवा के लिए कष्ट ना दे .....
जय द्वारकाधीश....
जय जय परशुरामजी...🙏🙏🙏
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